सम्पादकीय
श्री स्वर्णकार सोशल ग्रुप (समिति), इन्दौर की स्मारिका आप तक पहुँचाने का एक छोटा सा प्रयास किया गया है। इस गुलदस्ते में भाँति भाँति इन्द्रधनुषी सुन्दर सुगन्धित फूल मिलेंगे। अपने लोगों के अपनों से अनूठे संवाद मिलेंगे। एक झरोखा ऐसा है जिसमें ऐतिहासिक स्मृतियाँ संजोई गई है। ग्रुप की स्थापना सन १९९५ में हुई तब से अभी तक की प्रतिवर्ष की चुनिन्दा तस्वीरें यहाँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। ग्रुप के समर्पित उन मील के पत्थरों का उल्लेख है जो इसके प्रचालन-संचालन के अधिष्टाता रहे हैं। ऐसे उन लोगों का प्रारंभ से अब तक की समस्त कार्यकारिणियों का क्रमवार सूचिबद्ध विवरण है। आप देख पाएँगे कि हमारा यह अपना ग्रुप एक समूह तो है ही पर उससे अधिक यह एक आत्मीय परिवार भी है। ग्रुप में सम्मिलित प्रत्येक मुखिया के चित्र और परिवार की संक्षिप्त जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। परिवार का स्नेहिल स्वरूप हमारे तीन प्रमुख कार्यक्रमों में दिखाई देता है। इन कार्यक्रमों को जिन्होंने भी देखा है; मुक्त कंठ से सराहा है। यह स्मारिका सबको उन अतीत के स्वर्णिम क्षणों को स्मृत कराने और गुदगदाने का काम करेगी। बीस वर्षों में एक चालीस वर्ष का जवान प्रौढ़ हो जाता है। आज के कई प्रौढ़ो को अपनी जवानी के छायाचित्र समूह में देख कर हम सब आश्चर्य चकित और प्रमुदित होंगे। आप यहाँ बच्चों की प्यारी कविता से लेकर कानून और जीवन से संबद्ध विद्वत्ता पूर्ण आलेख आप पाएँगे। ग्रुप के नियत कार्यक्रमों के पीछे नेपथ्य में परिवार के ही उन निष्ठावान यूथ द्वारा आंतरिक संयोजन और सृजन कहाँ और कैसे होता है इसका आपको दर्शन भी होगा एक आलेख में। इस मंच का नाम है "सर्जना मंच" यहाँ किसी के पास कोई पद नहीं है केवल उनका अपना स्वीकार किया हुअा दायित्व ही है, यहाँ सब स्वयंसेवक ही हैं। सन २०१५ में एक पॉवर पॉइन्ट प्रेजेन्टेशन सर्जना मंच ने तैयार कर सोशल ग्रुप की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का प्रदर्शन किया गया था। इसकी सफलता को देखते हुए इस बार अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक मीडिया का उपयोग कर एक फिल्म बनाई जा रही है। इसके अनुसार स्मारिका का अधिकतर भाग आप फिल्म के रूप में देख पाएँगे। यह फिल्म यू ट्यूब पर भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त एक प्रयास और किया जा रहा है कि स्मारिका पी डी एफ फार्म में आपके मोबाइल, कंप्यूटर और इन्टरनेट पर भी उपलब्ध हो सके। स्मारिका संपादक मण्डल के सामूहिक योगदान का प्रतिफल है।
हमारा प्रयास सार्थक सेवा है। संपूर्ण परिवार का इसमें अतुलनीय सहयोग है।
सदाशयता के साथ!
रामनारायण सोनी
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