Friday, August 27, 2021

आईना वर्सेस तुम


(जीवन दर्शन)

आईना अपना कुछ नहीं तुम्हारा सच बोलता है। कभी कभी वह आभासी सच बोलता है जैसे कि बायें गाल पर लगे तिल को दायें गाल पर बताता है। तुम साफ साफ दिखो इसके लिये समय समय पर उस पर लगी गर्द को साफ करते रहना जरूरी है। विज्ञान कहता है कि तुम्हारे साइज के आधे का आईना तुम्हें पूरा पूरा दिखा सकता है। 
आईने का सच असल में तुम्हारा सच है। तुम्हारी रोती शक्ल को आइना मुस्कुराता हुआ नहीं बता पाएगा। आईना तुम्हारे सिद्धान्त नही आचरण और व्यवहार बताता है। आईना तुम्हारा इतिहास नहीं वर्तमान बताता है। उसके पास इतिहास होता तो वह तुम्हें तुम्हारा बचपन दिखा देता। वह रीयल टाइम कमेन्ट्री है। तुम्हारे आँसुओं से आईना गीला नहीं होगा। 
तुम्हारे अँधेरे में वह मौन है पर तुम्हारे उजाले वह तुम्हें लौटा देता है। वर्तमानकाल का संज्ञान जानना हो तो आईने की फंक्सनालिटी से सीखो। भविष्य भी वह नहीं दिखा सकता। आईना तुम्हे साहस देगा। 
अपना आईना टूटने मत दो वरना तुम टुकड़े टुकड़े दिखाई दोगे। अपने खुद के सच से डर कर आईना देखना छोड़ मत देना वरना हो सकता है तुम फिक्टीशियस वर्ल्ड में जीते रहोगे। आईना तुम्हारा जितना स्पष्ट सच बताएगा उतना दुनिया में कोई नही बता सकता। तुम खुद भी खुद से झूँठ बोल लेते हो पर आईना नहीं। 

रामनारायण सोनी

डॉ मुरलीधर चाँदनी वाला

आलोचक का नाम - रामनारायण सोनी साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Perspective) सांस्कृतिक परिधियाँ (Cultural Peripheries) केंद्र बनाम परिधि (Ce...