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एक छोटी सी घटना जीवन में विलक्षण और क्रान्तिकारी परिवर्तन ला सकती है। जिसे लोग हजारों बार देखते होंगे पर उन में छिपे रहस्यपूर्ण तथ्यों पर गौर करें तो परिणाम गजब के होते हैं।
चीन का महान दार्शनिक लाओत्से के जीवन की क्रान्तिकारी घटना:
लाओत्से एक बार एक वृक्ष के नीचे बैठा था!
अचानक हवाएं चलने लगी। उसकी नजर एक सूखे पत्ते पर पड़ी हवा के झोखे से वह पत्ता कभी एकदम ऊपर उड़ जाता, फिर अचानक जमीन पर आ पड़ता था! कभी वह दाये और कभी वह बाये या कभी ऊपर कभी नीचे !
उसने देखा वह पत्ता बिल्कुल राजी था उसे ऊपर उड़ने मे कोई अहंकार नहीं था और न ही नीचे गिरने की शिकायत नहीं थी। दाये बाये पूरब पक्षिम किसी भी दिशा मे जाने पर कोई विरोध नहीं था। पत्ता हर स्थिति में *"सहज"* था। अपने आसपास उपस्थित परिस्थिति से एकदम सहमत। अलबत्ता वह पत्ता हवाओं के साथ मस्त था।
लाओत्से वहाँ से उठ गये एक अद्भुत आनंद के साथ एक नए अनुभव के साथ!!
ये क्षण उसके जीवन मे एक नई क्रंति उत्पन्न कर गया। जहाँ शिकवा शिकायत है वहाँ प्रार्थना नहीं और जहाँ प्रार्थना है वहा कोई शिकवा कैसा?
बस एक अहोभव है सहजता का, मस्ती का। इसमें एक अद्भुत शांति है। पूर्ण धन्यवाद आभार से भरी हुई।
निवेदक
रामनारायण सोनी