Saturday, July 27, 2019

तपन है साधना


तनिक सी अर्चियों के भास से ही क्यो कोई भागे।
तपन की आँच से कुंदन की पीली भित्तियां जागे।
                         डॉ जय वैरागी

डर के आगे जीत है। डर की कोई हद है। अंग्रेजी में एक टेक्नीकल शब्द है "थ्रेशोल्ड" जिसका अर्थ है कि तमाम कायदे इस लिमिट तक है इसके बाद ये नियम निष्प्रभावी हो जाएँगे। जैसे पर्वत शिखर तक पहुँचने के लिए चढ़ाई है फिर मैदान ही मैदान या उतार। कुन्दन तपने से डरेगा तो निखार नही मिल सकेगा। संपूर्ण जीवन संघर्षों से भरा है। लोग संघर्ष को लड़ाई समझने की भूल कर लेते हैं। वस्तुतः वह अपने अस्तित्व को कायम रखने की जद्दोजहद है। दाना पानी की तलाश से डरने वाला पंछी नीड़ में बैठे बैठे मर जाता है। सुन्दर पंखों का स्वामी मुर्गा जीवन भर मैला खाता रहता है तो दूसरा साइबेरिया से जीवन और आनन्द की साहसी उड़ान भर यहाँ कर सफल हो कर लौट जाता है। जो डर गया समझो मर गया। जो आँच से डर गया वह साँच से डर गया।
तपन भी संस्कार है। सोने का पुराना आभूषण तपा कर गलाया जाता है तब लगता है यह प्रक्रिया विध्वंस है परन्तु यह एक नये स्वरूप, नये आकार, नई सज्जा की तैयारी है। तपन के अलावा कोई और रास्ता नही। यही संस्कार है। सोना सोना ही रहेगा संस्कारित हो कर निखर जावेगा। इसलिये तपन की आभास से मत डरो तपन को साधना बना लो।

रामनारायण सोनी

डॉ मुरलीधर चाँदनी वाला

आलोचक का नाम - रामनारायण सोनी साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Perspective) सांस्कृतिक परिधियाँ (Cultural Peripheries) केंद्र बनाम परिधि (Ce...