Thursday, May 28, 2020

लघु काल-चिन्तन १

लघु काल-चिन्तन १

मेरा मुझ में क्या है?
एक साल के बच्चे को ध्यान देखा, वह दुनिया के बारे में कितना जानता है? बहुत ही थोड़ा। मैं सोचता हूँ आज मुझ में जो है वह कहीं न कहीं से तो आया है। मनन से पता चला कि दुनियाँ की पहली पहचान माँ ने कराई। आचरण और व्यवस्थापन पिता से, शिक्षा शास्त्र और स्वाध्याय से ज्ञान गुरू से आया, जीवन का एक बड़ा हिस्सा समाज से आया। इन सब से बहुत कुछ आया पर मुझ में रुका केवल वही जो मुझे पसन्द आया। आज मैं जो भी हूँ इस संचय ही से हूँ। अच्छा या बुरा।
लेकिन जो मिला वह पहले था नहीं और इसलिये वह ऋण ही है, जिससे लिया उसका ऋण। क्या ये सारे ऋण बिना चुकाए ही दुनिया से चला जाऊँगा? नहीं ना। आज की इस सुबह ने मुझे कुछ नये काम दे दिये हैं। चलो मेरे संग इसी तरह आप भी, कुछ करें।

रामनारायण सोनी
२९.०५.२०२०

लौट आओ चाँद मेरे!

लौट आओ चाँद मेरे! सुनो तुम भी ! मेरा चाँद अब नक्षत्र हो गया है। वह पहले भी मेरी धरती की रात में दिखता था और अब भी।  चाँद शायद यह सोचता होगा ...