Saturday, November 24, 2018

प्रेमघट

प्रेमघट 
"प्रेम" हृदय के रसमय घट में भरा द्रव है। इसे द्रव्य समझने की भूल न करना। घट भरते भरते किनारे पर आवेगा तो छलकने लगेगा और तब एक साथ महक उठेंगे महुआ, चमेली, जुही, चम्पा। वातावरण स्निग्ध हो उठेगा। विज्ञान में द्रव का एक महत्वपूर्ण गुण बताया गया है (cohesion) लगाव।
प्रेम के सगे सम्बन्धी हैं; करुणा, दया, अपनत्व, एकजुटता। ये अगर आस पास दिखाई दें तो समझना एक प्रेम से भरा हृदय आस पास ही कहीं है। भ्रमर का फूलों तक पहुँचना सिद्ध करता है कि उसमे पराग उपस्थित हो चुका है। पराग एक रसात्मकता है। जहाँ प्रेम है वहाँ आप एक अप्रतिम, अलौकिक रसात्मकता का अनुभव करेंगे।

डॉ मुरलीधर चाँदनी वाला

आलोचक का नाम - रामनारायण सोनी साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Perspective) सांस्कृतिक परिधियाँ (Cultural Peripheries) केंद्र बनाम परिधि (Ce...