Wednesday, September 12, 2018

*ऊर्जा का रूपान्तरण*

*ऊर्जा का रूपान्तरण*
दीप का जलाना चेतना का आह्वान है, एक उजाले को निमन्त्रण है, एक परमार्थ का आरोहण है, प्रभा का विस्तार है, कर्तृत्व का जागरण है।
दीपक, बाती और तेल; ये सभी जड़ हैं। दीपक अपने भीतर अव्यक्त ऊर्जा का भंडार लिए बैठा है। शायद वह इसे जानता ही नही। उसे यह बात बताएगा भी कौन? वह स्वयं भी घोर अज्ञान रूपी अन्धकार में बैठा है। सुप्त ऊर्जा को एक चिनगी चाहिए, एक स्टार्टर चाहिए, एक संसर्ग चाहिए।
इसे चेतना मिलेगी तो इसमें सन्निहित ऊर्जा का रूपान्तरण हो जाएगा। चेतनता प्राप्त होने पर यह एक अौर दीप जलाने में सक्षम हो जावेगा। फिर इस दीप से फिर एक और दीप। पर यह दीप अकेला अपने बल पर नहीं जल सकता, इसे चेतनता चाहिये।

*इसलिए तुम अपने जड़त्व को परमात्म- चेतन से जोड़ दो और स्व के रूपान्तरण को साक्षात् अनुभव करो। सच मानो वह परमात्मा तुम्हारे कल्याण के लिए बाहें फैलाए खड़ा है।*
*तो चलो सत्य की ओर...

डॉ मुरलीधर चाँदनी वाला

आलोचक का नाम - रामनारायण सोनी साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Perspective) सांस्कृतिक परिधियाँ (Cultural Peripheries) केंद्र बनाम परिधि (Ce...