डॉ रवीन्द्रनारायण पहलवान की एक कविता
"नए दिन का मतलब"
खिड़की पर चिड़िया ने आकर
चीजें कहां
मैंने चादर अपने ऊपर खींच ली।
चिड़िया फिर चीं-चीं बोली,
अब मैंने कहा -
सुबह-सुबह क्यों सताती हो,
सोने दो ना।
चिड़िया बोली -
मैं तुम्हें उठाने आई हूँ
सवेरा हो गया
नया दिन शुरू हो गया,
नया दिन मतलब
तुम्हारे जीवन की किताब का
एक नया पन्ना।
डॉ रवीन्द्रनारायण पहलवान
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मेरी नजर में
बात की शुरुआत कविता के अन्तिम पद से करना होगी।
नया दिन मतलब तुम्हारे जीवन की किताब का
एक नया पन्ना। जीवन एक किताब है। किताब के पन्ने समय की कलम से लिखे गये या लिखे जाने वाले आलेख हैं। नये दिन का मतलब हमारे जीवन की किताब का एक नया पन्ना है। हर सक्ष को हर दिन अपने जीवन की किताब का एक नया पन्ना मिलता है। चाहो तो इस पर लिखो या कुछ न लिखो। जैसा भी हो यह पन्ना तो पलटेगा ही। यह स्वाँस के अंतिम छोर तक चलता रहेगा। समय अपनी धुरी पर अपनी निर्बाध गति से चलता है। जीना तो वर्तमान में ही है और न ही जीवन की वास्तविकता से दूर भागा जा सकता है। हर नए दिन का स्वागत होना चाहिये। बस आज सुबह उसी किरण को पकड़ कर उजालों की तलाशना शुरू कर देना चाहिये।
कठोपनिषद् का सूत्र सफल जीवन का मूलमंत्र है।
"उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।" कुछ लोग इसका अर्थ थोड़ा इस तरह करते हैं - उठो, जागो, और जानकार पुरुषों का श्रेष्ठ सान्निध्य प्राप्त करो। लेकिन 'उत्तिष्ठ' का शब्दार्थ है उठ कर खड़े होना। जाग्र का अर्थ जागना नही है वरन् जाग्रति को प्राप्त होना है, चेतना को जगाना है। उठ कर खड़े होना एक भाव है कि आलस्य, प्रमाद, अक्रियाशीलता आदि का त्याग करो। अपनी चेतना, जो तुम में सर्वत्र व्याप्त है, उसे जाग्रत करो। शेर जंगल का राजा होता है, अपरिमित बल का स्वामी भी है और शिकार वहाँ है भी परन्तु -
उद्योगिनं हि पुरुष सिंहमुपैति लक्ष्मी
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।।
सोते हए शेर के मुख में शिकार आ कर नही गिरेगा उठ कर शिकार करना पड़ेगा। इसलिये उपनिषद् का ऋषि संदेश करता है कि खड़े हो जाओ और सक्रिय हो जाओ।
कविता में चिड़िया ऋषि ही की तरह सोते हुए "मैं" को चीं - चीं कर जगा रही है। हमारा शरीर और मन बड़ा प्रमादी है। उसे आराम बहुत पसन्द है। चादर खींच कर वापस पड़े रहना प्रमाद और आलस्य ही तो है। चिड़िया की बार बार की चिचियाहट प्रमाद की लय को तोड़ कर एक नये उजाले का, नये उत्साह का, नये दिन का शुरू होना बता रही है। आज का का यह नया दिन नये प्रश्न, नई चुनौतियाँ, नये कर्मक्षेत्र, नये लक्ष्य ले कर आया है। तुम्हारे जीवन के कृतीत्व रूपी किताब के पिछले पन्नों के साथ इस पन्ने को भी जुड़ना है।
ऐसा लगता है कि हम अभी तक प्रमाद भरी एक प्रगाढ़ निद्रा में सो रहे थे और अभी अभी चिड़िया ने आकर हमें झकझोर कर खड़ा कर दिया है। अब सामने लक्ष्य होंगे, रास्ते होंगे, विकल्प तथा संकल्प होंगे और होंगी जीवन को जीने की अदम्य इच्छा। मानो तो यह चिड़िया हमें हम से परिचय कराने आयी है।
रामनारायण सोनी