Tuesday, February 19, 2019

चादर

धागे हमने चुने लचर
अब गाँठ उम्र भर लगनी है
साँसे हमने बुनी कुवाँरी
अब चादर कहाँ सुधरनी है

लौट आओ चाँद मेरे!

लौट आओ चाँद मेरे! सुनो तुम भी ! मेरा चाँद अब नक्षत्र हो गया है। वह पहले भी मेरी धरती की रात में दिखता था और अब भी।  चाँद शायद यह सोचता होगा ...