Tuesday, May 30, 2017

कहानी एक गूँगे की

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कहानी एक गूँगे की

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आज मोदी के एक एक दिन गिने जा रहे है, ऐसे गूंगे की बात याद नहीं आ रही है क्या? वो गूंगा दस साल खा गया किसी को पता भी नही चला, और आखिर में वह बिचारा बिना बोले चला गया।

डॉ कहते हैं कि जो जन्म से ही बहरे होते हैं वो ही गूँगे होते हैं क्योंकि उसे पता ही नहीं है कि भारत माता कैसे बोला जाता है, वन्दे मातरम् कैसे बोला जाता है, क्योंकि उसने ये शब्द सुने ही नहीं। भाई सा.! गूँगे होते ही ऐसे हैं। यह गूँगा और भी स्पेशल इसलिए है कि इसमें इंडीजीनियस रोबोटिक सिस्टम लगा है। इस गूँगे में इम्पोर्टेड लिसनिंग मशीन थी जो फिट कर के रोबोट को पोग्राम कर देती थी। अब गूँगे की चौकसी करने की जरूरत नहीं थी, गूँगा ऐसा कमाल का फंक्शनिग करने लगता था कि लोग शिनाख्त नहीं कर सकते थे।
किशोर कुमार का वो गाना याद है- जितनी चाबी भरी राम ने...
उस गूँगे के दिमाग पर बोतल वाला कॉर्क लगा कर वातावरण में खुला छोड़ दिया जाता था। हाँ,
आपने किसम - किसम के गूँगे देखे होंगे पर ये सर्वोच्च प्रकार का आदर्श गूँगा था। ये देखता भी था पर पार्शियल देखता था। पार्शियल कैसा? ताँगे के घोड़े की तरह का। उसे आँख पर टोपा चढ़ाया जाता था जिससे वह बिदक न जाए और केवल सामने देखे।
कमाल देखो गाँधी जी के तीनो आदर्श एक सिंगल आदमी (?) में समाहित थे। कमाल का असेट था। जिस नोट में गाँधी जी बैठे थे उसमें भी दस्तखत कर बैठा। एक हादसे में उसकी आवाज जाते जाते बची, गर्मी में नलों की टपकती धार जैसी बारीक हो गई।
रही सही कसर तो तब पूरी हुई जब इस रोबोट में एक बच्चा बैटरी फिट हो गई लोगों ने इस बैटरी का नाम "पप्पू बैटरी" रख दिया। लोग हरकत से बाज नहीं आते, इस बैटरी को निकाल कर उससे चाइना का खिलोना चलाने लग जाते हैं। एक बार यह बैटरी फुल डिस्चार्ज हो गई तो विदेश से २६ दिन बाद लौटी।
जब जब बैटरी अलग होती तो रोबोट डबल गुम-सुम। स्थिति तो तब विकट हो जाती है जब प्रोग्राम करने वाली मेडम को अंग्रेजी हिंदी दोनों नहीं आती। इसका जावा स्क्रिप्ट लिखने वाला बुढ़ापे में दूसरी शादी करके के कहीं चला गया। यह छ्ठवाँ भी ऐसा निकला। हालत ये है भाइ सा. कि क्या कहें, दीवाली पर लगाई जाने वाली सीरिज का हर गुलुप शॉट है। कुनबे के लोग कह रहे हैं लाइट चली गई है पर हकीकत यह है कि पूरी सीरिज फाल्ट है।
पता चला कि जिसे शादी करना थी वह कर नहीं रहा और छठवाँ बूढ़ा दूल्हा घोड़ी पर से अभी अभी उतरा है। बाराती राजबाड़ा पर नाच रहे हैं।
क्या बताएँ भाई सा. थ्री इन वन गूँगा, पप्पू बैटरी, बूढ़ा दूल्हा और प्रोग्रामर बहन जी एक कमरे में दीवाल की तरफ मुँह करके बैठे माय-माता पूज रहे हैं।

रामनारायण सोनी

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