Tuesday, May 30, 2017

संवाद

आदरणीय श्री सोनी जी
आपकी शब्दशः प्रतिक्रिया पर अभिभूत हूं
मेरी लेखनी आपके शब्द पाकर कृत्कृत्य हे ।और संघर्ष के पल में  मेँ अकेली नही  यह राहत भी बहुत बड़ी ताकत है । बड़ो का असीम स्नेह छोटो का प्यार ईश कृपा से मिला है ।
आपने इतनी सुंदर प्रतिक्रिया दी है कि इसे शब्दशः डायरी में उतार कर सदैव अपने साथ रखूंगी ।
और क्या कहूं क्य्युकी आँखे  अब कुछ और कहने की इजाजत नही दे रही  .....।
ये आंसू नही बल्कि  आप सभी का असीम स्नेह पाकर ख़ुशी का इज़हार हे
पुनः धन्यवाद शब्द बहुत ही छोटा होगा क्य्युकी यह शब्द नही  सिर्फ यह तो आगे की लेखनी के लिए  मुझे  सशक्त धरातल प्रदान करेगा .....।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

[21/04, 06:58] रामनारायण सोनी: जुड़कर टूटने की वेदना मेरा निजी नासूर तो बनी ही,लेकिन मुझसे इतर मेरी ही दुनिया ने इस टूटने की जिम्मेदारी थोपने की चेष्टा में मुझे ही आलोचनाओंक-प्रत्यालोचनाओं के घेरे में ले लिया। 

टीप:-
"जुड़ना और जुड़ कर टूटना" नियति की विद्रूप तूलिका से निर्मित आकार जीवन में किसी ज्वालामुखी के बिखरे लावा से कम नहीं है। जलते लावा को कोई नहीं छूता अलबत्ता लोग समझाएँगे कि इससे दूर रहें।
नियति ने इस विध्वंस में एक सृजन छिपा रखा है वह है अप्रतिम ऊर्जा की उर्मियाँ, अप्रतिम उर्वरा।
💐💐💐

अपने मार्ग को समतल बनाना है तो केवल मुझे ही……। कोई दूसरा मेरा मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकता।

टीप:-

साहस और कर्म के बीज बोने की क्षमता तो खुद में स्थापित करना होगी। एक बात तय समझें कि जो उर्वरा ठण्डे हुए लावा में है वह साधारण मिट्टी में नहीं। पर जरूरत है उर्वरा के सदुपयोग करने की।
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बदले हुए इस जीवन ने मुझे एक नई दृष्टि दी….जीवन मूल्यों के प्रति नई दृष्टि। इस दृष्टि में संभावनओं का अनंत आकाश झिलमिला रहा था।

टीप:-

आपकी बोई फसल काटने पूरा गाँव आएगा। तब आपको जीवन में असीम सुख और आनन्द की अनुभूति हुई होगी कि ईश्वर ने आपमें "देने" की क्षमता समाहित कर दी है। यह क्षमता आपके मन में कई संभावनाओं का सृजन करती हैं।
(उस लड़की के छोटे-से जवाब ने मुझे अपने ही जीवन की सार्थकता का बोध करा दिया।)

💎💎💎

जीवन में संघर्ष ओर विरोधाभासी परिस्थितियॉ आती है,लेकिन आत्मा का चेतस बना रहे…….आत्मविश्वास की लौ प्रदीप्त रहे…………….क्षमता से अधिक सह जाएं …………..अच्छे समय की प्रतीक्षा करें………….गोया संघर्ष के पल-पल को हम अपना बना लें……………तब देखिए,वह आपका गर्व ………….आपकी हिम्मत बन जाता है। 

टीप:-

संघर्ष के बिना जीवन का सोंदर्य पाना असंभव है। संघर्ष के साथ जुड़ा है अवसाद, आत्महीनता, घृणा, पलायन और तितिक्षा। इस प्रबल झंझा में खड़ा रखने वाला केवल एक ही संबल है वह है आपका आत्मविश्वास। अपने कर्मों का बीज बोना और धीरतापूर्ण फसल पकने की प्रतीक्षा करना। यह आवश्यकीय है।
आपकी सफलता उतनी ही चमकदार है जितना तीव्र आपका संघर्ष है।

👍👍👍
मैं यह आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखूँ तो कहूँगा-
यजुर्वेद का मंत्र है--
सुषारथि अश्वानिव यन्मनुष्यान नेनीयते अभिषुभिर्वाजिन इव।
हृत प्रतिष्ठं यदजीरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।। यजुर्वेद ३४/६

जिस प्रकार उत्तम सारथि घोड़ो को लगाम से साध कर भलीभांति चलाता है | उसी प्रकार हमारा मन जो अतयंत फुर्तीला और वेगवान है, हमारे जीवन को चलाता है। हे ईश्वर मेरा मन शुभ संकल्पों वाला हो।

संघर्षों के क्षणों में आपके संकल्प में मन में शिवत्व न होता तो बड़ा विध्वंस प्रस्तुत हो जाता। मन को नियंत्रित करती है बुद्धि। इसलिए भागवत कहती है--सत्यं परं धीमहि। और बुद्धिर्यस्य बलं तस्य।

मेरी वैदिक शुभकामना है--

येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः।
यद्पूर्वं यक्ष्मन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु। यजुर्वेद ३४/२

जिस मन से कर्मठ और धीर विद्वान लोग अपने सब शुभ कर्म करते हैं।
जो अपूर्व और पूज्य मन सबके अन्दर है। वह मन शुभ विचारों वाला हो।

निवेदक
रामनारायण सोनी
[21/04, 11:25] सीमा जी वनांचल: आदरणीय बहुत बहुत अभिभूत हु
आपकी इतनी सुंदर शब्द श्रखला के लिए ।
आपकी प्रतिक्रया को हमेशा साथ रखूंगी मेरी ताकत बना कर
आपके शब्दो में इतनी  राहत हे की मेरे झर झर आंसू निकल पड़े है
आपका स्नेह बस यु ही बना रहे 🙏
[21/04, 12:06] रामनारायण सोनी: आपमें मैं इतना स्नेह और अपनत्व देख रहा हूँ जितना अपनी अपनी छोटी बहन में देखता हूँ।
[21/04, 13:01] सीमा जी वनांचल: 🙏🙏कितनी सुन्दर बात है
ऐसे ही अपनत्व बना रहे ईश आशीर्वाद से मुझे इतना अनुपम उपहार भाई के रूप में मिला है  ।
[21/04, 16:26] सीमा जी वनांचल: 👌👌👌👌वाकई
रामबाण औषधि हे यह आलेख
[21/04, 16:31] सीमा जी वनांचल: अतीत अच्छा नही है तो भूलने में ही समझदारी है उसके दुःख का बोझ लाद कर गर हम चले तो अपना वर्तमान और भविष्य दोनों ही खराब कर बैठेंगे ।
परमात्मा का दिया जीवन यु व्यर्थ नही गवानां है हमे ।पुरे आत्मविश्वास से इसका सामना करना है ।
वास्तव में सिर्फ साँस का चलना हो जीवन नही अपितु उत्साह से भर कर चलना ही जीवन  हे जिजीविषा हे
बहुत बहुत बहुत ही सार्थक रचना है
🙏🙏

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