प्रकृति में सर्वत्र सौन्दर्य विद्यमान है।
सौंदर्य संवेदनात्म-भावनात्मक गुण-धर्म और मूल्यों का अध्ययन है। कला, संस्कृति और प्रकृति का प्रतिअंकन ही सौंदर्य का सृजन है। कलात्मक कृतियों, रचनाओं आदि से अभिव्यक्त होने वाला अथवा उनमें निहित रहने वाले सौंदर्य का तात्विक, दार्शनिक और मार्मिक विवेचन है। सौंदर्य किसी अच्छी वस्तु या स्वरूप को देखकर हमारे मन में जो आनन्ददायिनी अनुभूति होती है उसके स्वभाव और स्वरूप का विवेचन तथा जीवन की विभिन्न अनुभूतियों के साथ उसका समन्वय स्थापित करता है।
प्रकृति, कला और साहित्य से संबंधित उत्तम सुरुचिपूर्ण दृष्टिकोण विकसित हुआ।
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