जीवन की सरिता
सरिता के तटबन्ध
तटबन्धों पर सटे सुहाने घाट
घाट साक्षी है जीवन प्रवाह के
साक्षी है धार के,
गुजरते पानी के,
चढ़ते उफान के,
झरते प्रपात के,
और जल की शीतलता के,
निर्मलता के, सरलता के
झरोखे इतिहास के
..... हाँ, मैं
लौट आओ चाँद मेरे! सुनो तुम भी ! मेरा चाँद अब नक्षत्र हो गया है। वह पहले भी मेरी धरती की रात में दिखता था और अब भी। चाँद शायद यह सोचता होगा ...
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