"जिन्दगी के कैनवास"
-इन्द्रधनुषी छटा के संग
मानव का मन सुख-दुख हास-परिहास मिलन-बिछोह सत्यासत्य की अनुभूति निर्माण-विध्वंस आदि अनेकानेक भावों को जीवन के कैनवास पर उकेरने को सतत क्रियाशील रहता है। भावों के ये रंग व्यक्ति की सोच-समझ को उभारते हुए उसके व्यक्तित्व को परिलक्षित तो करते ही हैं उसकी सामाजिकता, चिंतन-मनन की गहराई को इंगित करते हुए जीवन के उतार-चढ़ाव का आकलन कर उसे सही दिशा निर्देश की अहम भूमिका भी अदा करते हैं। वस्तुतः मानव-मन की स्पृहा ही जीवन में अनेक रंग भरती रहती है, धूप-छांव की तरह ये रंग कहीं अधिक गहरे होते हैं तो कहीं हल्की लकीरों में बहुत कुछ कह देते हैं।
कृतिकार श्री रामनारायण सोनी की काव्यकृति "जीवन के कैनवास" पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सभी ओजस्वी पूर्ण रचनाएँ कवि के अनुभवों की प्रौढ़ता का बखान करती नजर आती है; इसे विभिन्न विषयों से भरा हुआ चिंतन मनन का दस्तावेज कहा जा सकता है; जिसमें पाठक को बहुविध पाठ्य सामग्री सहज ही उपलब्ध हो जाती है।
यथार्थतः ये रचनाएँ श्रृंगार, भक्ति, प्रकृति, लोक कल्याण आदि समयानुकूल सहज-सरल मार्ग पर अपनी छाप छोड़ती हुई, अनुभव के रंग बिखेरती हुई समाज को अनकही बातों से साक्षात्कार करा देती है। यथा-
यथार्थ के धरातल पर चलता हुआ कवि जीवन की सफलता के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए कहता है-
"आओ यथार्थ की भूमि पर
साहस की बीज बो लें हम
कर्म के पैने औजार पर
पड़ी जंग धो लें हम"
उस असीम शक्ति को जाने बिना जीवन अधूरा है। कवि की कलम अध्यात्म का रंग इन शब्दों में भरती है-
i) सबका सिरजन हारा प्रभु तू
ii) मैं कृतज्ञ हूँ तेरा प्रभुवर
iii) मन उतावला हो उठता है-अनंत आकाश को अपनी बांहों में भींचने को - मन गा उठता है केवल तुम, हाँ केवल तुम....
श्रृंगार जीवन का सुनहरा अध्याय है जिसमें खुशियां गुदगुदाती है प्यार का नया रंग भर देती है।
i) मेरे गीत कहीं मर न जाए बिन तुम्हारे...
ii) दीवार पर टंगे इस कैनवास पर
तुम मेरी प्रतिनिधि रचना हो जीवन की...
iii) गीतों का माधुर्य छंद में
पाकर प्रीत तरुण होती है
जागे जब उल्लास हृदय में
तब तब प्रीत गहन होती है...
जीवन के एक एक लम्हे को जी भर के जी लेने का प्रयास ही सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने का उत्साह भरता है-
जो लम्हा साथ हैं उसे, जी भर के जी लेना।
खिली हो चांदनी उसे, जी भर के पी लेना।।
काव्य-कृति की समस्त रचनाएं जीवन के आदर्शों को पल्लवित करती है, अनुभवों के रंगों से सराबोर है जिन्हें सार रूप में लिखना षिष्ट-पेषण ही होगा। कवि के शब्दों में-
भावना के स्रोत से जो
मिल सका झरती रही
लेखनी बन पथ सबल
छंद वह लिखती रही...
मुझे यह कहते हुए आत्मिक आनन्दानुभूति एवम् गर्व हो रहा है कि कृतिकार श्री रामनारायण सोनी ने इस कृति की समस्त रचनाओं में रचनाधर्मिता का सफलता पूर्वक निर्वाह किया है। रचनाएँ पठनीय, बोधगम्य एवं प्रेरणादायी हैं। इस सफलतम कृति के लिए उन्हें साधुवाद।
तत्सम शब्दावली, भावानुसार शब्दों का सही तालमेल वर्तनी की शुद्धता, कृति की उपादेयता में वृद्धि करती है। मुझे विश्वास है यह काव्यकृति सुधि-पाठकों के चिंतन-मनन में वृद्धि करेगी।
कवि की कलम इसी प्रकार गतिमान रहे, भाव-सुमन महकते रहें, ऐसी मैं दिव्यात्मा से प्रार्थना करता हूं।
उत्तरोत्तर प्रगति एवं उज्जवल भविष्य की अनेक शुभकामनाओं के साथ।
शुभेच्छु
कृष्ण लाल गुप्ता
कृष्ण लाल गुप्ता
39, गणेश पुरी कॉलोनी
खजराना, इंदौर
मो. 9424011368
No comments:
Post a Comment