मेरे आलेख और रचना
धागे हमने चुने लचर अब गाँठ उम्र भर लगनी है साँसे हमने बुनी कुवाँरी अब चादर कहाँ सुधरनी है
धोबी धोवे कूट कूट कर
आलोचक का नाम - रामनारायण सोनी साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Perspective) सांस्कृतिक परिधियाँ (Cultural Peripheries) केंद्र बनाम परिधि (Ce...
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