Thursday, July 7, 2022

आँखों का भावकोष

आँखों का भावकोष

आँख में एक छोटी सी पुतली और उस पुतली में छोटा सा वह छेद कमाल का है। इस छेद से सारा दृश्यमान जगत और यह अनन्त आकाश आदमी के अन्तस में प्रवेश कर जाता है। लेकिन इस अन्तस में भावनाओं, संवेदनाओं का विशाल कोष पहले से भी भरा पड़ा है। जैसे तिनकों में पड़ी हल्की सी चिंगारी को तनिक सी हवा मिलते ही कभी कभी यह उद्दीप्त हो उठता है वैसे ही अन्तर्जगत और बहिर्जगत के भावनाओं और घटना क्रमों के मेल से आदमी आन्दोलित हो उठता है। यह बात तो तय है कि इस चल रही मनःस्थिति को नयनों के माध्यम से स्पष्ट देखा जा सकता है। हमारी देहयष्टी में केवल आँख एक ऐसी क्षमता रखती है जो भीतर चल रहे प्रवाहों को बाहर प्रकट करने में सक्षम है। इसका अपना शब्दकोष या कहें कि भावकोष होता है जो ईश्वर की अनमोल देन है। इसकी अपनी अभिव्यक्ति क्षमता है। एक एक भावभंगिमा एक संपूर्ण उपन्यास से कम नहीं। 
इसीलिये मैं कहता हूँ कि...
जो उनकी आँखों में बयां होते है
वो लफ्ज किताबों में कहाँ होते हैं।

रामनारायण सोनी
०८.०७.२२

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