Tuesday, May 30, 2017

संक्षेपिका

संक्षेपिका
प्रेम-सूत्र
प्रेम की पारिभाषा करने का प्रयास मत करो। लक्षण जान कर समझ जाओगे। जिसको याद करने का प्रयास करने की जरूरत न हो तथा यदि तुम उसको भूलने का प्रयास करो और भूल नहीं पाओ तो समझ लो कि तुम्हे उससे प्रेम हो गया है। प्रेम तुम्हारी आन्तरिक माँग है। यदि उसके दुःख को शेयर करने से तुम सुख अनुभूत करते हो तो समझो तुम्हें उससे प्रेम हो गया है। दोनों को यदि बैठने को एक एक सीढ़ी मिले और यदि तुम निचली सीढ़ी चुनते तो समझो तुम्हें उससे प्रेम हो गया है। तुम कही भी हो और वह भीतर ही भीतर तुम्हारे साथ हो लिया तो तुम्हें उससे प्रेम हो गया है।
यदि यह प्रेम लौकिक है तो तुमने जीवन को जीने का सही तरीका जान लिया है और यदि यह अलौकिक है तो परमात्मा तुम्हारे लिए बाहें फैलाए खड़ा है। उनमें समा जाओ।

रामनारायण सोनी

जो अविरल है वही निर्मल है।

गीत को न मिले यदि कण्ठ तो
गीत

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