महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि समाज के विकास मे जिम्मेदार कौन व्यक्ति है। मेरा मानना है कि जिस प्रकार परिवार के विकास की जिम्मेदारी परिवार मे सबसे बुद्विमान व्यक्ति पर होती है, उसी प्रकार समाज के विकास की जिम्मेदारी समाज भी उसी बुद्विमान डाक्टर, इंजीनियर, वकील, राजपत्र अधिकारी, सफल उद्योगी और सफल व्यवसायी की होती है। आज समाज मे पिछड़ापन, अन्ध विश्वास, अशिक्षा, गरीबी आदि सभी के लिये समाज के बुद्विमान लोग जिम्मेदार है क्योकि जब तक बुद्विमान लोग समाज का नेतृत्व नही करेंगे तब तक ना तो समाज का विकास संभव है ना ही देश का विकास संभव है। वहीं यह भी आवश्यकीय है ताकि समाज का सर्वांगिण विकास संभव हो सके। जहां देखो
दलित बुद्विमान लोग समाज के विकास की अच्छी-अच्छी बाते करते है जबकि उनके वास्तविक सामाजिक कार्यों, अंशदानो पर नजर डाले तो बिल्कुल नगण्य है जबकि उनकी बडी बड़ी बाते केवल अच्छे अच्छे भाषणो तक सीमित होकर रह गई है।
अक्सर सुनने मे यह आता है कि दलित बुद्विमान लोग समाज मे पिछड़ेपन, अंधविश्वास, अशिक्षा, शोषण तथा अधिकारो के हनन की बात करते है लेकिन वे इस बात पर ध्यान नही देते है कि ऐसा क्यो हो रहा है तथा उनके उपायों पर विचार नही करते और अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नही करते है। यदि आप चाहते है कि समाज का विकास हो तो समाज के बुद्विमान लोगो को त्याग की भावना रखते हुए आगे बढकर समाज का नेतृत्व करना होगा ताकि समाज का सर्वांगिण विकास हो सके। आज समाज का विकास उसी प्रकार संभव है जिस प्रकार व्यक्ति का विकास संभव है क्योकि व्यक्ति के विकास पर ही समाज का विकास टिका हुआ है। बिना अधिकारो की सुरक्षा व्यक्ति की सफलता की उम्मीद करना बेईमानी है। हमे अपने अधिकारो की सुरक्षा के लिये सजग व जागरूक होना होगा।
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