Friday, June 2, 2017

लघु चिन्तन

लघु चिन्तन

सौंदर्य प्राप्ति की अभिलाषा है तो पहले भीतर का सौंदर्य प्राप्त करो। अन्यथा सौंदर्य सामने खड़ा होगा अौर आप प्यासे खड़े रह जाओगे।

भीतर तो सौंदर्य ही सौंदर्य है परन्तु वह बाहर के अनावश्यक कूड़े करकट से आच्छादित है। इसे हटा कर अथवा इससे हट कर उस अप्रतिम सौंदर्य की अरुणिमा की अनुभूति कर सकोगे। यहाँ आनन्द का निखिल संसार आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। आओ तो सही।

निवेदक
रामनारायण सोनी

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