Friday, June 3, 2022

सचिव की कलम से

सचिव की कलम से

इन्डियन सोसाइटी ऑफ ऑथर्स, इन्दौर चेप्टर, इन्दौर का प्रमुख उद्देष्य उदीयमान लेखकों, विचारों, चिन्तकों, रचनाकारों का द्रुत गति से विकास हो इसके लिये उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें एक मंच प्रदान करना और उनका उत्साह वर्धन करना है। इस बहुउद्देश्यीय कार्य में वरिष्ट साहित्य शिल्पियों, समाजजनों, कलाकारों का समेंकित दिशानिर्देशन और आशीर्वाद प्राप्त हो इसके लिये संस्था सदैव उन्हें निवेदित और आमन्त्रित करती रहती है कि वे नवोदित सदस्यों को अपने अनुभवों और पारस्परिक संवाद के माध्यम से प्रोत्साहन तथा मार्गदर्शन प्रदान करते रहें। हम चाहते हैं कि इस तरह सकारात्म साहित्य का सृजन होता रहे। इसी तारतम्य में संस्था का यह प्रयास है कि साहित्य के समग्र विकास हेतु उसकी वभिन्न विधाओं के रचनाकारों का समूह एकीकृत हो कर कार्य करे और वे समाज में व्याप्त विसंगतियों, कुरीतयों को उजागर करें, समाज को स्वस्थ तथा समरसता प्रदान करने वाले साहित्य का सृजन करें। हमारी संस्कृति की सनातन परम्परा में वनाञ्चलों में 'गोष्ठ' वह स्थान था जहाँ सामूहिक चिन्तन और वैचारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सरोकारों पर परिचर्चा की जाती थी इसी कारण इन बैठकों को गोष्ठी कहा जाता है। इस प्रयोजन की प्रतिपूर्ति हेतु संस्था निरन्तर प्रतिमाह सभा/गोष्ठी आयोजित करने का प्रयास करती है, ताकि सदस्यगण आपसी संवाद, उद्बोधन, काव्यपाठ, रचनापाठ आदि के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त कर इनका आदान प्रदान कर सके। संस्था का पवित्र उद्देश्य यह भी है कि सभी सदस्य राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकारों में सकारात्मक साहित्य सृजन के प्रति जागरूक हों और इस तरह वे राष्ट्र निर्माण तथा राष्ट्र के विकास में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएँ। प्रतिमाह बैठक शहर के हृदयस्थल कुन्द कुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर में की जाती है ताकि शहर के किसी भी क्षेत्र से आ कर आसानी से भाग ले सकें इसके लिये हम कुन्द कुन्द ज्ञानपीठ के कृतज्ञ हैं।
युगान्तर के साथ साथ रचनाकर्म का स्वरूप भी प्रायः बदलता रहता है इसलिये उनके द्वारा रचित साहित्य के स्वरूप में परिवर्तन होना संभाव्य है। महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की पंक्तियाँ "नवगति नवलय ताल छ्न्द नव, नवल शक्ति नव जलद मन्द रव" इसी युगान्तर में वांछित क्रान्ति की ओर संकेत करता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारी गोष्ठी में आलेख, लघुकथा, कहानियाँ, गीत, नवगीत, गज़ल आदि साहित्य की विभिन्न विधाओं का स्वागत किया जाता है। संस्था क्षेत्रीय भाषा मालवी, निमाड़ी, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा में अपनी रचना धर्मिता के विकास का आह्वान करती है। 'इन्सा' नवोदित/स्थापित साहित्यकारों की पुस्तकों के लोकार्पण, प्रचार-प्रसार, समीक्षा आदि प्रक्रिया हेतु प्रयास करती है और उन्हें ससम्मान गरिमामय मञ्च प्रदान करती है और उन्हें प्रोत्साहित करती है। इसके अन्तर्गत इस वर्ष दो पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जा चुका है। इसी क्रम में इन उद्देष्यों की प्रतिपूर्ति के हेतु से हम यह साझा संकलन प्रकाशित करने जा रहे हैं। इसमें भाग लेने वाले सदस्यों का हम हार्दिक धन्यवाद करते हैं। सम्पादक मण्डल के मानद सदस्य श्री रवीन्द्र नारायण पहलवान, डॉ अंजुल कंसल एवं श्री राशिद अहमद शेख ने इस साझा संकलन को सुव्यवस्थित ढंग से सजाने संवारने का भरपूर प्रयास किया है।
साहित्य सृजन एक पारमार्थिक कर्म है आइये हम सब मिल कर इस माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपना भरसक सहयोग प्रदान करें।
        
रामनारायण सोनी
सचिव

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