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Thursday, June 14, 2018
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लौट आओ चाँद मेरे!
लौट आओ चाँद मेरे! सुनो तुम भी ! मेरा चाँद अब नक्षत्र हो गया है। वह पहले भी मेरी धरती की रात में दिखता था और अब भी। चाँद शायद यह सोचता होगा ...
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आत्मबोध व्यष्टि, समष्टि और सृष्टि, और आत्मा बबूल का बीज देखा है कभी? चपटी सी माला में एक बहुत सख्त छिलके वाला काली बटन सा बीज। एक आदमी जिद...
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"*पाषाणी संवेदना, कितनी दूर;कितनी पास"* पत्थर को कभी बोलते सुनते देखा है? एक छोटे से छोटे प्रयास का मूल्यांकन करना है तो सबसे ...
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क्या कानून केवल साक्ष्य ही के नेत्रों से देखता है? ऐसा हो न हो लेकिन लॉ ग्रेज्युएट, खण्डवा निवासी कवि अरुण सातले जी ने अपनी रचना के माध्यम स...
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